पांचाली के चीर हरण पर जो चुप पाए जायेंगे,
इतिहासों के पन्नो में वे सब कायर कहलायेगे ||
कहाँ बनेंगे मंदिर मस्जिद कहाँ बनेगी राजधानी,
मंडल और कमंडल पी गए सबकी आँखों का पानी ||
प्यार सिखाने वाले बस ये मजहब के स्कूल गए,
इस दुर्घटना में हम अपना देश बनाना भूल गए ||
कहीं बमों की गर्म हवा है और कहीं त्रिशूल जले,
सांझ चिरैया सूली टंग गयी पंछी गाना भूल गए ||
आँख खुली तो पूरा भारत नाखूनों से त्रस्त मिला,
जिसको जिम्मेदारी दी वो घर भरने में व्यस्त मिला ||
क्या यही सपना देखा था भगत सिंह की फ़ासी ने,
जागो राजघाट के गाँधी तुम्हे जगाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
जो अच्छे सच्चे नेता है उन सबका अभिनन्दन है,
उनको सौ सौ बार नमन है मन प्राणों से वंदन है ||
जो सच्चे मन से भारत माँ की सेवा कर सकते है,
हम उनके कदमो में अपने प्राणों को धर सकते है ||
लेकिन जो कुर्सी के भूखे दौलत के दीवाने है,
सात समुंदर पार तिजोरी में जिनके तहखाने है ||
जिनकी प्यास महासागर है भूख हिमालय पर्वत है,
लालच पूरा नीलगगन है दो कौड़ी की इज्ज्ज़त है ||
इनके कारण ही बनते है अपराधी भोले भाले,
वीरप्पन पैदा करते है नेता और पुलिस वाले ||
केवल सौ दिन को सिंघासन मेरे हाथों में दे दो,
काला धन वापस न आये तो मुझको फ़ासी दे दो ||
जब कोयल की डोली गिद्धों के घर में आ जाती है,
तो बगला भगतो की टोली हंसों को खा जाती है ||
जब जब जय चंदो का अभिनन्दन होने लगता है,
तब तब सापों के बंधन में चन्दन रोने लगता है ||
जब फूलों को तितली भी हत्यारी लगने लगती है,
तो माँ की अर्थी बेटों को भारी लगने लगती है ||
जब जुगनू के घर सूरज के घोड़े सोने लगते है,
तो केवल चुल्लू भर पानी सागर होने लगते है ||
सिंहो को म्याऊँ कह दे क्या ये ताकत बिल्ली में है,
बिल्ली में क्या ताकत होती कायरता दिल्ली में है ||
कहते है की सच बोलो तो प्राण गवाने पड़ते है,
मैं भी सच्चाई को गाकर शीश कटाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
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