Thursday, 21 July 2011

चिट्ठी...

एक गुजारिश माया से
सुनो माननीया, इस आम आदमी की आवाज।
बनाओ ना इस उत्तर-प्रदेश को भारत के सर का ताज।।

तुमसे हमें बस इतना ही कहना है।

इस आम आदमी को खुशहाल उत्तर-प्रदेश में रहना है।।

 सुना है ...

कल भोर ही तो लाडली काम को घर से निकली थी !

शाम बलात्कार के फंदे में मौत के पेंड से लटकी थी !!

सुना है...

कल रात एक माँ ने अपने बच्चे को भूखा सुलाया था।
एक पति ने अपनी पत्नी को पीट-पीटकर जलाया था।।

सुना है...

कल उस मूँछ वाले घूसखोर ने खूब कमाया था।
कल ही उसने अपना एक नया घर बनावाया था।

सुना है...

कल एक युवक कुछ रद्दी बेचकर आया था।
उसमें मार्कशीट थी, ९० प्रतिशत अंक पाया था।।

सुना है...

कल एक पिता ने अपने बेटे की चिता को जलाया था।
सरकारी डॉक्टर ने उसे अपने क्लिनिक बुलाया था।।

सुना है...

आप चाहती हैं कि हर आदमी इस प्रदेश को अपना माने।
पर इन तकलीफों को वह किस पैमाने पर जाने।।

सुना है...

आप इन तकलीफों को हमसे दूर करेंगे।
तभी हम इसे अपना उतर-प्रदेश कहेंगे।।

No comments:

Post a Comment