Thursday, 7 July 2011

शमशान में शराब

तरस खा के पी गए
पीने दो सारी अभी रात बाकी है,
आपके नाम का एक और जाम बाकी है !
जाना है महखाने से आज मुझे लडखडाते हुए,
पीने दो अभी कदमों में थोड़ी सी जान बाकी है !!
———**********——— 
बोतल छुपा दो कफ़न में मेरे,
शमशान में पिया करूंगा,
जब खुदा मांगेगा हिसाब,
तो पैग बना के दिया करूंगा !!!
———**********———  
गम इस कदर मिला,
  घबरा 
के पी गए,
खुशी थोडी सी मिली,
मिला
के पी गए,
यूं तो न थे हम पीने के आदी,
शराब को तन्हा देखा,
तो तरस खा के पी गए !!!
———**********———
करोगें याद गुजरें जमाने को,
तरसोगें हमारे साथ एक पल बिताने को,
फ़िर आवाज दोंगे हमें वापस बुलाने को,
और हम कहेंगे दरवाजा नही है स्वर्ग से वापस आने को !!!
———–**********———
दिल जीत ले वो जीगर हम भी रखते हैं,
कातिल कर दे वो नजर हम भी रखते हैं,
वादा किया हैं किसी को सदा मुस्कुराने का,
वरना आंखो में समंदर हम भी रखते हैं !!!
————–**********—————–
जब भी याद आती हैं,मुस्कुरा लेते हैं,
कुछ पलो के लिए हर गम भुला देते हैं,
कैसे भीग सकती है पलकें आपकी,
आपके हिस्से के आंसू तो हम बहा लेते हैं !!!
————–**********—————–
लौट जाते हैं लोग गम हमारा देख कर,
जैसे लौट जाती है लहरे किनारा देख कर,
तु कंधा न देना मेरे जनाजे को,
कही ज़िंदा
न हो जाऊं तेरा सहारा देख कर !!!
————–**********—————–
लीखूं कुछ आज ये वक्त का तकाजा हैं, 
दिल में दर्द अभी ताजा है, 
गिर पडते हैं आंसू मेरे कागज पर, 
लगता है कलम में स्याही कम दर्द ज्यादा है…!!!
————–**********—————–

 मोर उवाच
ना पीने का सहूर ...
ना लडखडाने का सलीका ...
कैसे-कैसे लोग चले आते है
मैखाने में ...... !!!

1 comment: