Friday, 24 August 2012

अवतार लेने आ रहे रघुवीर

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औरो की पीर देख छलकने लगे जब नीर।
तो जानलो अवतार लेने आ रहे रघुवीर ॥

संदेश फैले चारो और नेह-प्यार के।
और हौंसले भी हों बुलंद सद-विचार के॥
जब क्रोध-मान-माया-लोभ हो उठे अधीर।
तो जानलो अवतार लेने आ रहे रघुवीर॥

करुणा-दया की आज डवां-डोल नाव है।
और क्रूर आँधियों का भी कैसा प्रभाव है॥
ऐसे में मुस्कुरा उठे दिल में सुलगती पीर।
तो जानलो अवतार लेने आ रहेर घुवीर॥

दस्तक दे यदि प्यार ही दिल के कपाट पर।
जल-पान करें सिंघ-गाय एक घाट पर॥
फूलो के हार में यदि ढलने लगे शमशीर।
तो जानलो अवतार लेने आ रहे रघुवीर॥

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