Saturday, 26 November 2011

भ्रष्टाचार बनाम जनलोकपाल




एक नजर...
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अन्ना के अभियान में,जनता उनके साथ.


शायद भ्रष्टाचार से,अब तो मिले निजात.


अब तो मिले निजात,साथ दो मुरली वाले.


जिधर देखिये उधर,लूट-हत्या-घोटाले
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जाहिर है प्रस्तावित जनलोकपाल विधेयक को भ्रष्टाचार निवारण का सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। जबकि यह आधा सच है। सरकारी संस्थानों को तो अन्ना  समूह जनलोकपाल की परिधि में ला रहे हैं, किंतु निजी क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का निवारण कैसे होगा या हम अपने अंतस के अंदर षुचिता का संचार कैसे करेंगे, जैसे मुद्दों पर अन्ना समूह चुप है।
प्रधानमंत्री, न्यायधीश और संसद को लोकपाल के दायरे में लाने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकेगा, यह निःसंदेह संदेहास्पद है। दरअसल आज भ्रष्टाचार लाइलाज रोग बन चुका है और इसका फैलाव हमारे पूरे षरीर में हो चुका है।
सच कहा जाए तो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भ्रष्टाचार व्यापार बन चुका है तथा हम इसकी जमकर खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। ठेले और खोमचे पर इसको गली-मोहल्ले में खरीदा व बेचा जा रहा है। स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार हमें दिलोजान से पंसद है।
जो भीड़ अन्ना के आगे-पीछे घूम रही है वह भी दिल पर हाथ रखकर अपने को ईमानदार नहीं कह सकती है। दूसरी बात यह है कि जिस व्यवस्था में परिवर्त्तन लाने की बात अन्ना कर रहे हैं, उसके ठोस विकल्प फिलहाल तो उनके पास भी नहीं है।
गौरतलब है कि जनलोकपाल का उद्देष्य जनोन्मुख है। इसलिए आम जनता का इसके साथ जुड़ाव होना स्वभाविक है। लेकिन यह कहना कि इससे भ्रष्टाचार का खात्मा किया जा सकता है, गलत होगा।
निदान
भ्रष्टाचार शायद मिट जायेगा,देश में जंग जारी है,

कीचड़ का हथियार लिये खड़े योद्धा,जोश भारी है।
यकीन नहीं एक दूसरे पर, फिर भी साथ साथ हैं,
कर्मवीरों का जंग के नाम पर धोखा देना जारी है।
चारों तरफ फैलाये घृणा का भाव, वाणी वाचाल है
दौलत की कीचड़ में, सज्जनता की खोज जारी है।
भ्रष्टाचार मिटे या नहीं, कौन देखने आयेगा फिर
इतिहास में दर्ज कराने का उनको शौक भारी है।
दीपक बापू दिखायें आईना आंदोलनों के इतिहास का
लोग रहे हमेशा खाली, नायकों की प्रसिद्धि बहुत भारी है।
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सरकारी व्यवस्था में इतनी खामियां हैं कि जब आम आदमी का पाला सरकारी ऐजेंसियों से पड़ता है और भ्रष्टाचार की वजह से उनका काम नहीं हो पाता है तो उनके मन में असंतोष का गहन संचार होता है। भले ही ऐसे लोग व्यक्तिगत तौर पर ईमानदार नहीं होते हैं, पर उनकी अपेक्षा दूसरों से सकारात्मक होती है। इन कारणों से टकराव का होना लाजिमी है।
आज सबसे बड़ी समस्या सरकार का विवेकाधीन अधिकार है। अस्तु इस तरह के हर किस्म के अधिकार से संबंधित निर्णय में नियंत्रण का होना आवश्‍यक है। लाइसेंसिंग व्यवस्था को खत्म करना भी लाभप्रद हो सकता है।
इस तारतम्य में भ्रष्टों को कठोर दंड देना, जांच ऐजेंसियों का इस्तेमाल स्वतंत्र निकाय की तरह करने एवं न्यायिक आयोग का गठन करके उसको न्यायधीशों को नियुक्त करने और उनको फैसला करने का अधिकार देने जैसे सुधार उपयोगी हो सकते हैं। पुनष्चः इसके बरक्स में सबसे महत्वपूर्ण कदम हर व्यक्ति का व्यक्तिगत तौर पर ईमानदार रहना होगा।
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विकाश के रथ का पहिया तेजी से चल रहा है,
रस्ते के गड्डों में भ्रष्टाचार का चिराग जल रहा है !
कई लोगों के बुझे थे चेहरे जो अब चमकते दिखते है,
पत्थर कि जगह अब सोने में उनका घर ढल रहा है !
गरीबी कि खौफ से लड़ने के लिए तनी हीरे जडी टोपे,
क्यों कि बेबसी और बेकद्री से पूरा शहर जल रहा है !
कहे हम बापू नक़्शे पर भले एक देश पर टूटे हालात है,
लूटने वाले हांथों में दौलत पसीना तो भूख पर पल रहा है ! 
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क्या है जनलोकपाल विधेयक

  • लोकपाल की जद में प्रधानमंत्री को भी रखा गया है और इनके खिलाफ कार्रवाई षुरु करने के लिए लोकपाल के सात सदस्यीय बेंच की सहमति आवश्‍यक होगी।
  •  न्यायधीष भी लोकपाल के दायरे में रहेंगे। इनके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए भी लोकपाल के सात सदस्यीय बेंच की सहमति आवश्‍यक होगी।
  • सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी उपर्युक्त प्रक्रिया दुहरायी जाएगी।
  • सभी सरकारी कर्मचारी व अधिकारी इसके दायरे में रहेंगे।
  • सीबीआई को लोकपाल के साथ मर्ज करना इस विधेयक में प्रस्तावित है।
  • लोकपाल के कर्मचारी व अधिकारी के खिलाफ आये षिकायतों का निपटारा स्वतंत्र निकाय के द्वारा किया जाएगा, जिसके सदस्य सिविल सोसायटी के सदस्य, अवकाशप्राप्त नौकरशाह एवं न्यायधीश रहेंगे।
  • राज्य स्तर पर नियुक्त लोकायुक्त पहले की तरह काम करते रहेंगे।
  • लोकपाल के पास यह अधिकार होगा कि वह दोषियों के खिलाफ सजा मुकर्रर कर सके। इसके अंतगर्त वह भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए व्यक्ति को कारावास व आर्थिक दंड की सजा सुना सकेगा। साथ ही उसकी संपत्ति को जब्त करने का आदेश भी दे पाएगा।
  • लोकपाल के विरुद्ध या कथित भ्रष्टाचारी के विरुद्ध झूठी षिकायत करने वाले के खिलाफ लोकपाल एक लाख तक आर्थिक दंड लगा सकेगा।
  • मोटे तौर पर भ्रष्टाचार के हर स्वरुप की जाँच लोकपाल करेगा।

पाला है हमने अब भी ये आज़ार किसलिए
गद्दीनशीन अब भी हैं गद्दार किसलिए

लगता है मुझको दाल में है काला कुछ जरूर

डरती है लोकपाल से सरकार किसलिए

ये लूटमार, रेप, घूस, कत्ल, घोटाले

है संविधान इस कदर बीमार किसलिए

खाते हैं कसम लाएंगे जनलोकपाल बिल

हमको मिला है वोट का अधिकार किसलिए

अब भी अगर न जागे, तो जल जाएगा समाज

है पास शांत-क्रांति का औजार किसलिए

सरकारी लोकपाल की दीवार गिरा दो

कमजोर अगर है, तो ये दीवार किसलिए

अब भी नदी के पार है जनलोकपाल बिल

हम लोग हैं अभी इस पार किसलिए
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